अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और जीवन की सुरक्षा की ढाल है। लेकिन हाल के दिनों में अरावली पर्वत को लेकर विवाद तेज़ हो गया है, जिसे लेकर पर्यावरण प्रेमी, स्थानीय लोग और राजनीतिक दल आमने-सामने हैं।
अरावली विवाद आखिर है क्या?
हाल ही में सरकार और संबंधित समितियों द्वारा अरावली पर्वत की नई परिभाषा (New Definition of Aravalli Hills) सामने आई है। इस नई परिभाषा के अनुसार:
- केवल 100 मीटर से ऊँचे पहाड़ों को अरावली माना जाएगा
- कई ऐसे इलाके जो पहले अरावली का हिस्सा थे, अब इस दायरे से बाहर हो सकते हैं
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे खनन (Mining), निर्माण कार्य,जंगल कटाई को बढ़ावा मिल सकता है। जिसका सीधा असर पर्यावरण और भूजल पर पड़ेगा। अरावली पर्वत NCR और राजस्थान के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच मानी जाती है।
इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। जहां सरकार अरावली की सुरक्षा का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी बढ़ाई है।
पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?
अरावली पर्वत:
- भूजल (Ground Water) को रिचार्ज करता है
- NCR और राजस्थान में जलवायु संतुलन बनाए रखता है
- रेगिस्तान के फैलाव को रोकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरावली को कमजोर किया गया तो:
- पानी का संकट बढ़ेगा
- गर्मी और प्रदूषण में इज़ाफा होगा
- आने वाली पीढ़ियों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा
राजनीति क्यों गरमा गई है?
इस मुद्दे पर राजस्थान और केंद्र की राजनीति भी गरमा गई है।
- एक ओर सरकार का कहना है कि नई परिभाषा से भी अरावली सुरक्षित रहेगी
- दूसरी ओर विपक्ष और पर्यावरण संगठन इसे अरावली को खत्म करने की साजिश बता रहे हैं
नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है और यह मुद्दा अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
अवैध खनन और कार्रवाई
अरावली क्षेत्र में पहले से ही अवैध बजरी और पत्थर खनन बड़ी समस्या है।
हाल ही में:
- कई जगहों पर पुलिस और खनन माफिया की मिलीभगत उजागर हुई
- कुछ पुलिस अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हुई
इससे साफ है कि समस्या सिर्फ कानून की नहीं, नियंत्रण और नीयत की भी है।
स्थानीय लोगों की चिंता
अरावली क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि:
- उनकी जमीन और जंगल छिन सकते हैं
- आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है
- बिना उनकी सहमति के फैसले लिए जा रहे हैं
लोग चाहते हैं कि विकास हो, लेकिन प्रकृति को नुकसान पहुँचाकर नहीं।
सुप्रीम कोर्ट और आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में:
- अरावली संरक्षण पर चिंता जताई है
- स्पष्ट मैपिंग और नियम बनाने पर ज़ोर दिया है
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और अदालत आगे क्या फैसला लेती है।
अरावली पर्वत सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य की सुरक्षा कवच है।
विकास ज़रूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति, पर्यावरण और आम लोगों के साथ न्याय करे।
अरावली बचेगी, तभी जीवन बचेगा।